Tuesday, November 24, 2015

मोदी के ब्रांड अंबेसडर ने ही मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया !


जनता ,नेता ,मंत्री दादरी के अखलाख को भूल गई लेकिन शहरुख याद हैं। सरकारें सुनपेड में दो दलित बच्चो को जिन्दा जलाने की घटना को भी भूल गई लेकिन आमिर खान पर सर फुट्टवल के लिये तैयार हैं। दादरी में अखलाख का परिवार अब क्या कर रहा है या फिर फरीदाबाद के सुनपेड गांव में उन दलित मां बाप की क्या हालत है जिनके दोनों बच्चे जिन्दा जला दिये गये, कोई नही जानता । लेकिन शहरुख की अगली फिल्म दिलवाले है। और आमिर खान की अगली फिल्म दंगल है। और इसकी जानकारी हर उस शख्स को है, जो मीडिया और सोशल मीडिया पर सहिष्णुता और असहिष्णुता की जुबानी जंग लड रहे हैं। लेकिन यह लोग अखलाख और सुनपेड गांव के दर्द को नहीं जानते। तो देश का दर्द यही है । शाहरुख और आमिर खान अपने हुनर और तकनीक के आसरे बाजार में बदलते देश में जितना हर घंटे कमा लेते है उतनी कमाई साल भर में भी अखलाख के परिवार और सुनपेड गांव के जीतेन्द्र कुमार की नहीं है। और कोई नहीं जानता कि अखलाख के परिवार का अपने ही गांव में जीना कितना मुहाल है और जीतेन्द्र कुमार को अब कोई सुरक्षा नहीं है जिसके आसरे वह स्वतंत्र होकर जिन्दगी जीता नजर आये।

लेकिन आमिर खान के घर के बाहर सुरक्षा पुख्ता है। यानी रईसों की जमात की प्रतिक्रिया पर क्या सड़क क्या संसद हर कोई प्रतिक्रिया देने को तैयार है लेकिन सामाजिक टकराव के दायरे में अगर देश में हर दिन एक हजार से ज्यादा परिवार अपने परिजनों को खो रहे है। और नेता मंत्री तो दूर पुलिस थाने तक हरकत में नहीं आ रहे है तो सवाल सीधा है । सवाल है कि क्या सत्ता के लिये देश की वह जनशक्ति कोई मायने नहीं रखती जो चकाचौंध भारत से दूर दो जून की रोटी के लिये संघर्ष कर रही है। इसीलिये जो आवाज विरोध या समर्थन की उठ रही है वह उसी असहिष्णुता के सवाल को कहीं ज्यादा पैना बना रही है, जो गरीबो को रोटी नहीं दे सकती और रईसों को खुलापन। असल में आर्थिक सुधार और बाजार अर्थव्यवस्था के रास्ते चलने के बाद बीते 25 बरस का सच यही है कि पूंजी ने देश की सीमा मिटाई है। पूंजी ने अपनी दुनिया बनायी है । और मनमोहन सिंह से लेकर नरेन्द्र मोदी तक उन्हीं गलियों में भारत का विकास खोज रहे है जो चकाचौंध से सराबोर है । इसीलिये सत्ता की महत्ता हथेलियो पर देश को चलाते 8 हजार परिवारो पर जा टिकी है, जिनके पास देश का 78 फीसदी संसाधन है। देश की नीतियां सिर्फ 12 करोड़ उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर बनायी जा रही हैं। यानी देश में असहिष्णुता इस बात को लेकर नहीं है कि असमानता की लकीर मोटी होती जा रही है। कानून व्यवस्था सिर्फ ताकतवरों की सुरक्षा में खप रही है । किसान को राहत नहीं मिली। मजदूर के हाथ से रोजगार छिन गया। महंगाई ने जमाखोरों-कालाबारियो के पौ बारह कर दिये। यह सोचने की बात है कि अखलाख के परिवार की त्रासदी या सुनपेड में दलित का दर्द शाहरुख खान की आने वाली फिल्म दिलवाले या आमिर की फिल्म दंगल तले गुम हो चुकी होगी। तो मसला सिर्फ फिल्म का नही है सिस्टम और सरकारें भी कैसे किसी फिल्म की तर्ज पर काम करने लगी हैं महत्वपूर्ण यह भी है।

सरकारों के ब्रांड अंबेसडर कौन है और देश के आदर्श कौन हो जायेंगे। याद कीजिये मोदी प्रधानमंत्री बने तो पीएमओ हो या इंडियागेट दोनो जगहों पर आमिर खान को प्रधानमंत्री मोदी ने वक्त दिया । महत्ता दी। कभी कोई गरीब किसान मजदूर पीएमओ तक नहीं पहुंच पाता लेकिन आमिर खान के लिये पीएमओ का दरवाजा भी खुल जाता है और प्रधानमंत्री मोदी के पास मिलने का वक्त भी निकल आता है । लेकिन आमिर खान ने कुछ इस तरह से प्रधानमंत्री मोदी के दौर को ही कटघरे में खडा कर दिया जो बीजेपी पचा नही पा रही है और मोदी सरकार निगल नहीं पा रही है।

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी और मोदी सरकार के मंत्री भी जिस तेजी से निकल कर आमिर खान को खारिज करने आये उतनी तेजी कभी किसी असहिष्णु होते नेता मंत्री के बयान पर नहीं दिखायी दी। ना ही अखलाख की हत्या पर कोई इतनी तेजी से जागा। तो क्या देश जुबानी जंग में जा उलझा है या फिर विकास के उस चकाचौंध में उलझा है जहां मान लिया गया है कि सत्ता के ब्रांड अंबेसडर रईस ही होते हैं। सत्ता रईसों के चोचलों से ही घबराती है। रईसों के साम्राज्य में कोई सत्ता सेंध नहीं लगा सकती । इसीलिये अर्से बाद संसद भी उसी तर्ज पर जाग रही है जिसमें असहिष्णुता के सवाल पर नोटिस देकर विपक्ष दो दिन बाद से शुरु हो रहे संसद के तत्कालीन सत्र में बहस चाहता है। यानी सवाल वही है कि असहिष्णुता के सामने अब हर सवाल छोटा है। चाहे वह महंगी होती दाल का हो । या फिर आईएस के संकट का । बढ़ती बेरोजगारी का है या फिर नेपाल में चीन की शिरकत का । यकीनन दिल किसी का नहीं मानेगा कि भारत में सत्ता बदलने के बाद सत्ता की असहिष्णुता इतनी बढ़ चुकी है कि देश में रहे कि ना रहे यह सवाल हर जहन में उठने लगा है। लेकिन जब देश के हालात को सच की जमीन पर परखे तो दिल यह जरुर मानेगा कि देश गरीब और रईसो में बंटा हुआ है । गरीब नागरिक वह है जो सत्ता के पैकेज पर निर्भर है और रईस नागरिक वह है जिसपर सरकार की साख जा टिकी है और उसी के लिये विकास का टंटा हर सत्ता चकाचौंध के साथ बनाने में व्यस्त है । इसलिये देश के हालात को लेकर जब देश का गरीब सत्ता से कोई सवाल करता है तो वह किसी के कान तक नहीं पहुंचता लेकिन जैसे ही चकाचौंध में खोया रईस सत्ता पर सवाल दागता है तो सरकार में बेचैनी बढ़ जाती है । ध्यान दें तो मोदी सरकार के ब्रांड अंबेसडर वही चेहरे बने जिनमें से अधिकतर की जिन्दगी में एक पांव देश में तो दूसरा पांव विदेश में ही रहता है । और संयोग से आमिर खान को भी मोदी सरकार का ब्रांड अंबेसडर बनने का मौका भी मिला और इंडिया गेट पर प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के साथ आमिर खान की गुफ्तगु हर किसी ने देखी समझी भी । तो क्या मोदी सरकार का दिल इसीलिये नहीं मान रहा है जिन्हे अपना बनाया वही पराये हो गये । मगर आखिरी सवाल यही है कि रास्ता है किधर और हालात लगातार बिगड़ क्यों रहे है । क्या देश उन परिस्थितियो के लिये तैयार नहीं है जहां मीडिया बिजनेस बन कर देश को ही ललकारते हुये नजर आये। और सोशल मीडिया कही ज्यादा प्रतिक्रियावादी हो चला है, जहां हर हाथ में खुद को राष्ट्रीय क्षितिज पर लाने का हथियार है। और हर रास्ता चुनावी जीत-हार पर जा टिका है । जहां मान लिया जा रहा है कि जुनावी जीत सत्ता को संविधान से परे समूची ताकत दे देता है । यानी तीसरी दुनिया के भारत सरीखे देश को एक साथ दो जून की रोटी से भी जूझना है और चंद लोगो के खुलेपन की सोच से भी।

7 comments:

Unknown said...

Achchhe din aur Vikas ka matlab hindu aatankvad ki neeiv rakhne ke barabar hota ja raha hai...

tapasvi bhardwaj said...

Bahut accha article sir

Unknown said...

ये असमानता तो भारत के इतिहास में पहले भी देखी गयी लेकिन इसे आसहनशीलता क्यों कहां जा रहा है|दो-तीन मुद्दों के कारण इसे इतना राजनीतिक तूल क्यों दिया जा रहा है,क्या ये मीडिया का प्रभाव हे या फिर लोगो की प्रधानमंत्री से उम्मीद जो पूरी नही हो रही है|पर एक आदमी लोगो की मानसिकता कैसे बदल सकता है|

Unknown said...

aaj hinduvadi Sangathan ,Tipu Sultaan Aur Aurangajeb Ko Atyachar aur Kroorata ka prateek ghoshit karane pe tule huye hain, Aur PM Modi MaunModi bane huye hain, Agar inase poochha jaye ki yadi aaj se 300 saal baad Agar koi Sarkaar ,2002 ke gujraat dangon ke naam par,Modi ke naam par Banane wale school,hospital aur road ke naam, kisi doosare ke naam par rakh de, To Modi Ko Kaisa Lagega????

मुसाफिर said...

Thank u so much sir
Aap pahle journalist honge sir jiski journalism
Indian aawam se tallukh rakhati hai
Nahi to ek taraf hamare marathwada main kisan suicide kar rahe hain aur dusari taraf ye dirty politics

Alianx said...

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Riya said...

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