Thursday, December 16, 2010

भ्रष्ट नौकरशाहों के जरिये राडिया ने खेला खेल

सीबीआई अगर वाकई सरकार के हिसाब से काम करती है तो 2जी स्पेक्ट्रम के साथ अब गैस को लेकर हुये घपले का खेल भी सामने आयेगा। नीरा राडिया के जरिये रतन टाटा ही नहीं अब रिलायंस ग्रुप या कहे मुकेश अंबानी को भी खंगाला जायेगा। और ए.राजा या कनिमोझी से आगे एनडीए के दौर में जो भी घपले नीरा राडिया के जरिये हुये उसे भी सामने लाया जायेगा। और इसके लिये नौकरशाहों को फंदे में लेने के लिये सीबीआई तैयार है जिन्होंेने नौकरी के दौरान निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिये फाइलों के हेर-फेर से लेकर अपने नफे-मुनाफे के लिये देश को चूना लगाया। असल में सरकार का रुख अब सीबीआई के जरिये उन रिटायर्ड नौकरशाहों पर दबिश करना है जो नीतियों की बारीकी को समझते हुये अपने कार्यकाल के दौरान निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाते रहे। इस कडी में ट्राई के पूर्व चैयरमैन प्रदीप बैजल अगर सीबीआई के पहला निशाना हैं तो अगर निशाना सुनील अरोड़ा हो सकते हैं।

दरअसल प्रदीप बैजल ने 2008 में रिटायर होने के बाद नीरा राडिया के जिस कंपनी नोएसीस में काम करना शुरु किया उसका मुख्य काम ही मुकेश गैस के जरिये रिलायंस को फायदा पहुंचाना था। और सीबीआई को जिन दस्तावेजों की तलाश है उसमें मामला 2जी स्पेक्ट्रम का नहीं बल्कि देश भर में गैस लाईन बिछाने की ग्रिड के लिये बने सरकारी पाइपलाईन रेगुलेटरी एंजेसी में रिलायंस के लोगों को नियुक्त कराना था। खास बात यह भी है कि सीबीआई, प्रदीप बैजल के जरिये एनडीए सरकार के दौर में बने डिसइन्वेस्टमेंट नीतियों के तहत जिन सरकारी कंपनियों या इमारतों को बेचा गया उसकी नब्ज भी पकडना चाह रही है। क्योंंकि 1966 बैच के प्रदीप बैजल ही पहले ड्सइनेवेस्टमेंट सचिव थे जिनके उपर उस वक्त कांग्रेस ने यह आरोप लगाया था कि सरकारी कंपनियों या होटल तक को कौडियों के मोल बेचकर खास निजी कंपनियों के लाभ पहुंचाया जा रहा है। चूंकि नीरा राडिया की चार कंपनियां चार क्षेत्रों में देश के बडे औद्योगिक घरानों के लिये फिक्सर का काम कर रही थीं, तो उन चारों क्षेत्र टेलीकॉम एविएशन, इन्फ्रस्ट्रचर और एनर्जी के मद्देनजर इन्ही से जुड़े नौकरशाहों पर सीबीआई नकेल भी कस रही है। राडिया के टेलीफोन टैपिंग में ये सारे मामले सामने भी आ रहे हैं। खासकर गैस की लड़ाई में पर्यावरण को लेकर कोई परेशानी रिलायंस को ना हो इसके लिये नीरा राडिया ने जिन रिटायर नौकरशाहों को काम पर लगाया था वह टेलीफोन टैप के जरिये अब सामने आ रहा है, कि किस तरह सुविधायें रिलायंस के जरिये बांटी जा रही थीं।

हाइड्रोकार्बन के डायेरेक्टर जनरल वीके सिब्बल के लिये बंगला खरीदने का जिक्र राडिया के साथ रिलायंस अधिकारियों के बीच बातचीत में दर्ज है। इसके लिये आरकॉम के जिन चार अधिकारियों को लगाया था उसकी फाइल सीवीसी दफ्तर में भी मौजूद है। लेकिन सीबीआई अब पर्यावरण प्रबंधन के नाम पर रिलायंस को लाभ पहुंचाने वाले नौकरशाहों की सूची भी बना रही है। इतना ही नही वित्त मंत्रालय के दो अधिकारियों ने उस दौर में कैसे रिलायंस को टैक्स माफ कराया जिसका आंकडा करीब 40 हजार करोड बताया जा रहा है उसकी फाइल भी अब सीबीआई ने अपने कब्जे में ले ली है। नीरा राडिया के फोन टैप से इंडियन एयरलाइंस के पूर्व सीएमडी सुनील अरोड़ा के जरिये सीबीआई बीजेपी को भी घेरने की तैयारी में है। क्योंयकि एयरलाइंस को लेकर जो भी गफलत सुनील अरोड़ा ने की वह तो राडिया फोन टैपिंग में सामने आया ही है आखिर कैसे सुनील अरोड़ा नीरा राडिया की पहुंच का इस्तेमाल कर एंडियन एयरलाइन्स के मैनेजिंग डायरेक्टर बनना चाहते थे। लेकिन सीबीआई की नजर सुनील अरोड़ा के जरिये राजस्थान में करोड़ों की जमीन को कुछ खास लोगों को दिलाने में कितनी भूमिका थी, इस पर है। क्यों कि सुनील अरोड़ा राजस्थान में तत्काखलीन मुख्यमंत्री के निजी सचिव थे। और तब सत्ता बीजेपी के पास थी। और बतौर निजी सचिव बिना सीएम के हरी झंडी के जमीनों को कौडियों के मोल खरीद कर बांटने की कोई सोच भी नही सकता है। उसी दौर में राजस्थान की कई जमीने कुछ खास नौकरशाहों को नीरा राडिया के जरिये मुफ्त या कौडियों के मोल बांटी गयी...यह भी टेलीफोन टैपिंग में सामने आ गय़ी है । खासकर गैस पर कब्जे को लेकर उस दौर में जमीन गिफ्ट में दी गयी और उसमें आरआईएल और एडीएजी में कौन नौकरशाह किस तरफ था इसे भी सीबीआई अब खंगाल रही है। क्योंीकि नीरा राडिया की चारों कंपनी में 16 ऐसे रिटायर्ड नौकरशाह काम कर रहे थे जो कि नौकरी के दौरान पहले भारत सरकार के लिय़े उन्हीं क्षेत्र में नीतियों को अमली जामा पहनाने में लगे थे जिसमें नीरा राडिया की रुचि थी, या कहें नीरा राडिया के जरिये कुछ खास कारपोरेट घराने अपना लाभ बनाना चाहते थे।

असल में दस्तावेजों के जरिये अब यह भी सामने आ रहा है कि नौकरशाहों की फेरहिस्त में नीरा राडिया ने अपनी कंपनी से रिटायर्ड आईएएस नौकशाहो के साथ साथ राज्यो के नौकरशाहों को भी जोड़ा जिससे किसी भी काम को अमली जामा पहनाने में कोई परेशानी ना हो। दिल्ली के अलावा मुंबई, बेगलुरु, चेन्नई, कोलकत्ता, हैदराबाद और अहमदाबाद में अगर कंपनियों का टारगेट टाटा के हर 31 प्रोडक्ट को लाभ पहुंचाना था तो मुकेश अंबानी के रिलांयस के साथ साथ छह से ज्यादा उन बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भी भारत में घुसाना था जो यहां के खनिज संस्थानो के खनन में रुचि रखते थे। और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के काम में कोई रुकावट ना आये उसके लिये सहायक कंपनियां कोच्चि, लखनऊ, रांची और भुवनेश्‍वर में खोली गयीं। जिसमें राज्यों के रिटायर्ड उन प्रभावी नौकरशाहों को काम सौंपा गया जिनकी पहुंच राज्यों के मुख्यमंत्री तक या फिर मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात अपने पुराने साथी नौकरशाह के साथ थी।

असल में राडिया टैप के जरिये जो नजारा सीबीआई के सामने आ रहा है उसमें पहली बार बडा सवाल यह भी उभरा है कि अगर देश के लिये काम करने वाला कोई नौकरशाह रिटायर्ड होते ही या फिर रिटायरमेंट लेकर किसी निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने में जुट जाये तो सरकार के पास क्या उपाय होगा। दूसरा बड़ा सवाल राजनीति के मद्दनजर उभरा है कि सरकार बदलने पर जैसे एनडीए के बाद यूपीए की सरकार केन्द्र में आयी या फिर झारखंड जैसे राज्य में मधु कोड़ा सरीखा एक निर्दलीय राजनीतिज्ञ के अंतर्विरोध की वजह से मुख्यमंत्री बन गया अगर वह किसी निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने में जुट जाये तो उससे देश के राज्स्व को जो चूना लगेगा उसकी भरपाई कौन करेगा। यह खेल टाटा के लिये अगर झारखंड में हुआ तो वेदांत ग्रुप के लिये उड़ीसा में नवीन पटनायक ने भी किया। और केन्द्र में बडी मुश्किल यह हे कि एनडीए के बाद जब गठबंधन के दौर में मंत्रालय ऐसे-ऐसे क्षेत्रीय दलों के नेताओं के हिस्से में गये जिनके लिये मंत्रालय का मतलब ही पैसा उगाही था तो फिर नीरा राडिया सरीखे कारपोरेट फिक्सर को कौन कैसे रोकता।

जाहिर है यह सारे सवाल सीबीआई के पास दस्तावेजों में तो मौजूद हैं, लेकिन इन दस्तावेजों के जरिये कोई भी सरकार इस पहल को रोकने की दिशा में कदम उठयेगी या फिर इसे भी अपनी राजनीतिक सौदेबाजी का हिस्सा बना लेगी। अब देखना यही है क्योंकि पहली बार सत्ता ही एक कशमकश में नजर आ रही है, जहा दांव पर देश का लोकतंत्र है।

11 comments:

डॉ .अनुराग said...

सात लाख नौकरशाह है जो बदलते नहीं.....सरकारे अलबता बदलती रहती है ....सो जाहिर है ..सोच रहा हूँ... नैतिक शिक्षा की क्लास हर छह महीने बाद कम्पलसरी गर करवा दे...

vipin dev tyagi said...

दरअसल अब ये सारा खेल मेरी कमीज,तुम्हारी कमीज से ज्यादा साफ है...इसको लेकर हो रहा है...बीजेपी, कांग्रेस पर जिस तीर से निशाना साध रही है यानी भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर....कांग्रेस भी उसी तीर को अपनी ढाल बनाकर,बीजेपी पर पलटवार करने की तैयारी कर चुकी है...रहा सवाल सीबीआई की जांच का तो ये बात कई बार साबित हो चुकी है कि जिसका राज उसके सिपाही,उसकी तोप और उसी की ही सलामी...हां सत्ता के खेल मे पयादों का जो अंजाम होता है वो यहां भी हो रहा है,आगे भी होगा..बलि का बकरा बनाना किसकी पुरानी अजमाई नीति रही है तो वो जगजाहिर है...और हर बार की तरह इस बार भी वो काम पूरी तन्मयता और ईमानदारी से किया जा रहा है...वैसे पार्टी चाहे जो हो...सबका एक ही मकसद है...सत्ता सुखम, परम सुखम...परम फलम....परम संतोषम

सम्वेदना के स्वर said...

प्रसून जी आपके ब्लोग पर आखिरी बार आ रहा हूं तो सोचा कारण भी बता दूं!

आपके बस के इतना भी नहीं है,कि कम से कम दीवार पर लिखे सच को पढ़ भर दें! बेईमान न होना और सिर्फ सैलरी को जस्टीफाई करने वाली पत्रकारिता ही क्या ईमानदार पत्रकारिता बन गयी है?

2जी का जो सोप ओपेरा आप सबने शुरु किया है, क्या यह सुब्रामनियन स्वामी के प्रधानमंत्री को लिखे हुये पत्रो और सुप्रीम कोर्ट में ये मामला उनके द्वारा ले जाने के बगैर सम्भव हो सकता था? क्या आप आपनी रिसर्च में स्वामी की वेब साईट को पढते हैं, जहां उनके द्वारा प्रधानमत्री को लिखे सभी पत्र मौज़ूद है?

क्या आपने 24 नवम्बर 2010 और 10 दिसम्बर का पत्र पढ़ा है? नहीं पढा तो पढें, और कम से कम अपने ब्लोग या टेलीविज़न कार्यक्रम में इसका जिक्र तो कर सकते हैं कि इन पत्रों में क्या लिखा है? यह पत्र तो बकायदा सुप्रीम कोर्ट भी बतौर सनद भेजे जा रहें हैं।
इस पत्रों को यहां पढें : http://www.janataparty.org/pressdetail.asp?rowid=59

आपके ब्लोग पर आने वालो के लिये एक बेहतरीन ब्लोग का पता जहां : सिर्फ मीडिया के काले कारनामों की समीक्षा होते मैने देखी है :
http://www.mediacrooks.com/

शिवम् मिश्रा said...


बेहतरीन पोस्ट लेखन के लिए बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से, आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है - पधारें - विजय दिवस पर विशेष - सोच बदलने से मिलेगी सफलता,चीन भारत के लिये कितना अपनापन रखता है इस विषय पर ब्लाग जगत मौन रहा - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

सतीश कुमार चौहान said...

मुझे तो नही लगता की निचोड में कुछ निकलेगा, सब उसी तरह से चलता रहेगा, सब को हिस्‍सा पहुच रहा हैं,जांच कमीशन की इण्‍उस्‍ट्री में कुछ और लोगो को खाने खुजाने का रोजगार मिल जाऐगा फिर अमीर हैं ? कौन काम कराने वाला ( जैसे भी )करने वाला नही, यही हैं नीरा राडिया का सच......सतीश कुमार चौहान भिलाई

हिंदीब्लॉगजगत said...

यदि आप अच्छे चिट्ठों की नवीनतम प्रविष्टियों की सूचना पाना चाहते हैं तो हिंदीब्लॉगजगत पर क्लिक करें. वहां हिंदी के लगभग 200 अच्छे ब्लौग देखने को मिलेंगे. यह अपनी तरह का एकमात्र ऐग्रीगेटर है.

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anoop joshi said...

sir naukarsaho ke saath saath kuch patarkaro ka naam bhi aa raha hai. kya ye sach hai?

Kajal Kumar said...

बेचारी फंस गई नीरा राडिया.
शायद कोई बौड़म ही होगा जो न जानता हो कि सत्ता के गलियारों में कौन-कौन और क्यों घूमते हैं. यह बात अलग है कि सबके अपने अपने उसूल हैं. कुछ बस उपर वालों को ही घास डालते हैं तो कुछ नीचे वालों का हाल चाल भी पूछ लेते हैं. और ये कोई आज शुरू नहीं हुआ है. Liaison, Retainer, reporter, PR और भी न जाने किस किस नाम से घूमते मिलते हैं ये. मंत्रियों व बाबुओं के बीच समान रूप से काम करते हैं ये... नीरा राडिया तो बस एक है वर्ना ये तो पूरे देश में हर ओर फैले हुए हैं और इस बात की भी एकदम पक्की गारंटी है कि ये यहां रहेंगे भी सदा. चाहे तो शर्त लगा लो.

कविता रावत said...

Badi machliya to jaal se baahar nikal jaati hai lekin chhoti phans jaati hai.... ..
..kuch din hota hai halla.. aaj din tak kitne kitne bade-bade ghotale karne walon ko sajja huyee hai, yah sab sochna ab shayad aam janta nahi chahti hai....
....aapne bahut se tatyon ko sapasht dhang se prastut kiya hai .. es jaagrukta bhari prastuti ke liye abhar

Harman said...

nice...

mere blog par bhi kabhi aaiye waqt nikal kar..
Lyrics Mantra

Ashit said...

आदरणीय प्रशून जी, मै आप का वैसे तो प्रशन्सक हू. आज की मीडिया और आप के नाम की चर्चा हम मित्र करते ही रहते है, आप का नाम बहुत आदर से लेते है. हम जिक्र करते है कि प्रशून जी काजल की कोठरी मे काले होने से बचे हुए है.इस देश मे सारे सेक्टर भ्रष्ट है, मीडिया भी पूरी शक्ति से कदम ताल कर रहा है. रादिया केस से तो यह साबित हो चुका है. किस तरह मीडिय पर्सन पैसा खा कर नये नये खेल खेल रहा है. अभी ताज़ा मुद्दा सपीक एशिया से सम्बन्धित न्यूज है. किस कारपोरट घराने से पैसा खा कर, स्पीक एशिया के खिलाफ़ मुहिम चलायी हुइ है. मैने भी गन्दे मीडिया की भाषा मे ब्रेकिन्ग न्यूज टाइप ब्लॊग लिखा है. क्रिप्या समय निकाल कर कमेन्ट कर दे. आप से शिकायत रहेगी कि आप ने भी इन भ्रष्ट मीडिया पर्सन्स के नाम लेने की हिम्मत नही दिखाइ.धन्यबाद
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