Saturday, December 8, 2018

स्वंयसेवक की चाय ! भरभरा कर गिरने वाले बांध को दो दो बोरियो से थामा नहीं जा सकता है साहेब...




जब नदी में उफान हो और बांध ही भरभरा कर गिरने की स्थिति में हो तब रेत की दो दो बोरियो को जुटा कर बांध बचाया नहीं जा सकता । चाय की प्याली टेबल पर रखते रखते स्वयसेवक के जुबा से निकलते इन शब्दो ने मुझे भी चौकाया और प्रोफेसर साहेब को भी । दोनो ही एक साथ बोल पडे, क्या मतलब है इसका ?
बेहद शांत स्वर में स्वयसेवक ने कहा आप हमेशा चाय की प्याली का तुफान मापते है इस बार देश के तुफान को समझे और बांध के भरभराने को परखे । बांध कौन है ? जैसे ही मैने कहा, तो इस बार प्रोफेसर साहेब ठहाका लगाकर बोले प्रसून जी आप भी बांध के बारे में पूछेगें । देश का मामला है तो उफान राज्यो के जनादेश से मापने की कोई गलती ना करें । मुझे ही कहना पडा ,लेकिन आज स्वयसेवक महोदय के तेवर ही कुछ और थे , बीच में लगभग कूदते हुये बोले ... आप तो बाहर से देख रहे है लेकिन मै तो अंदर से देख भी रहा हूं और दिवालियापन को समझ भी रहा हूं । दिवालियापन यानी....यानी जिस तरह 2014 की तर्ज पर ही 2019 की बिसात बिछायी जा रही है उसमें आपको जानकार हैरत होगी कि काग्रेस का भ्रष्ट्रचार और राम मंदिर पर उग्र तेवर का काकटेल बना कर ये परोसना चाहते है । पर 2014 में तो विकास की बात थी । अब टोकते हुये प्रोफेसर साहेब बोले , तो स्वयसेवक महोदय लगभग बिगड गये ...और गुस्से में बोले आप टोके नहीं तो मै समझाउ.. जी हम चाय की चुस्की लेते है आप ही 2019 को लेकर घुंधलके को साफ किजिये । धुधलका क्या है अब तो एक्जीट पोल ने जिस तरह काग्रेस की जीत तय की है उसी का विस्तार 2019 में हो जायेगा .... प्रोफेसर साहेब फिर बोले तो स्वयसेवक महोदय बोल पडे आप चाय का मजा लिजिये ...लेकिन समझने की कोशिश किजिये कि पटरी से गाडी उतर क्यो रही है । जी बताइये...और प्रोफेसर साहेब आप भी सुने , मुझे ही स्टैड लेना पडा ।
तो बांध भरभरा रहा है और भरभराते बांध को ये एहसास ही नहीं है कि उसकी दो दो बोरियो से अब नदी का उफान रुकेगा नहीं । और ये 11 दिसबंर को जब साफ होगा तो कल्पना किजिये 2019 के लिये कौन सी बोरिया लेकर बांध बांधने की कोशिश होगी । जरा सिलसिलेवार समझे ....एक तरफ उग्र हिन्दुत्व का उभार बुलंदशहर में उभरा । काग्रेस के भ्रष्ट्रचार को मुद्दा बनाने के लिये ब्रिट्रिश बिचौलिये मिशेल का दुबई से प्रत्यापर्ण कर लाया गया । यानी 2014 के बाद विकास का बही खाता बता कर चुनाव में जाने की हिम्मत मोदी सरकार के पास नहीं है । लेकिन जिन दांव को ये खेलना चाहते है वह दांव भी इन्हे उल्टा पडेगा । ये आप कह रहे है । मुझे टोकना पडा । जी , मै ही कह रहा हूं , क्योकि भ्रष्ट्रचार तो सत्ता का सिस्टम होता है । और हमेशा विपक्ष भ्रष्ट्राचार के मुद्दे को उठाता है लेकिन जब सत्ता उठाने लगे तो कई परते उघडती है । मसलन ? मसलन यही कि यूपीए के दौर में सीएजी विनोद राय और अगस्ता वेस्टलैड के बिचौलिये मिशेल एक नहीं है । और ये हर कोई जानता है कि विनोद राय के प्रसेपशन वाली कोयला और 2 जी घोटाले की रकम को ही करप्शन का मुद्दा बनाकर बीजेपी ने काग्रेस को कटघरे में खडा किया । विनोद राय बीजेपी के लिये सरकारी प्यादा बन गये । लेकिन मिशेल क्यो बनेगें । क्योकि सत्ता का प्यादा बनने का मतलब है जो बयान अंतर्रष्ट्रीय कोर्ट में मिशेल ने दिया है उस  बयान से पलट जाये । और मिशेल को अंतर्रष्ट्रीय कोर्ट बरी कर चुका है । तो सत्ता जो चाहती है वह कैसे मिशेल बोल देगें । मान्यवक सत्ता क्या बुलवाना चाहती है मिशेल से .....प्रोफेसर साहेब ने उत्सुकता में पूछा , तो स्वयसेवक महोदय बोले अब तो ये देश का बच्चा बच्चा जानता है कि मिशेल एक बार कह दें कि फैमली का मतलब है गांधी परिवार और एपी का मतलब है अहमद पटेल । और मसला यही है कि इंटरनेशवल कोर्ट में मिशेल ने सिर्फ खुद को कानूनी तौर पर बिचौलिया होने के कार्य पर बोला है । तो मिशेल बीजेपी की 2019 की बिसात पर कैसे और क्यो प्यादा बनेगा । बात तो सही है और आप दूसरा मुद्दा उग्र हिन्दुत्व को बुलंदशहर से कैसे जोड रहे थे ।
आपको ये तो पता है ना कि 6 दिसबंर को योगी आदित्यनाथ को दिल्ली बुलाया गया । जी । क्यो बुलाया गया । ये तो आप बतायेगें । प्रोफेसर साहेब की इस टिप्पणी पर स्वयसेवक महोदय मुस्कुराये और बोल पडे । योगी सीएम है और 2019 में यूपी के सीएम की महत्ता क्या होगी ये दिल्ली की सत्ता बाखूबी समझ रही है । और अब मामला यूपी में कानून व्यवस्था का नहीं है बल्कि कानून के राज की एवज में हिन्दुत्व के पोस्टर ब्याय के तौर पर खुद को स्थापित करने का है । और दिल्ली चाहती है कि इस काम को तेजी से किया जाये । लेकिन योगी चाहते है ये काम धीरे धीरे हो जिससे वह ना सिर्फ पोस्टर ब्याय बने बल्कि हालात संभालने की उनकी काबिलियत पर भी मुह लगें । समझे नही , साफ कहे मुझे् टोकना पडा,,प्रसून जी आपको भी साफ बताना होगा कि बजरंग दल और बिहिप ही नहीं बल्कि बीजेपी का कार्यकत्ता भी अगर बुंलदशहर में पुलिस के हत्या में आरोपी है तो फिर राज्य का मुखिया कानून व्यवस्था देखे या हिन्दुत्व का पोस्टर ब्याय बने । अब प्रोफेसर साहेब से रहा नहीं गया ... तो झटके में बोल पडे । मुस्किल है कोई भी प्रयोग एक बार ही होता है । दूसरी बार संभव नहीं है । यही तो मै भी कब रहा हूं ..अब स्वयसेवक महोदय बोले । लेकिन मै कुछ समझ नहीं पा रहा हूं . मुझे ही कहना पडा । इसमें समझना क्या है , गुजरात के प्रयोग से मोदी निकले तो यूपी के प्रयोग से योगी निकलेगें । अंतक सिर्फ इतना है कि गुजरात के वक्त अटलबिहारी वाजपेयी थे जो राजधर्म की बात कह रहे थे और यूपी के वक्त खुद राजधर्म वाले मोदी जी है जो अपने लिये योगी का बलिदान चाहते है । और योगी इन हालातो को समझ रहे है तो समझे टकराव कहा कैसे होगा . और 2019 के बाद बीजेपी के हाथ में क्या होगा और उसका चेहरा कौन होगा । तो क्या आप 2019 में मोदी का अस्त देख रहे है । मै कोई अस्त या उदय नहीं देख रहा हूं ...सिर्फ हालात बता रहा हूं कि कैसे उग्र हिन्दुत्व की डोर और करप्शन के आसरे 2019 में बेडा पार करने की तैयारी है ।
अब मुझे टोकना पडा... तब तो कोई विजन या कोई सिस्टम तक काम नहीं कर रहा है ।
क्यो अब प्रोफेसर साहेब ने मुझे ही टोका ।
इसलिये क्योकि बुलंदशहर की घटना से पुलिस का मनोबल डाउन होगा या तो सत्ता विरोधी होगा । औऱ ध्यान दिजिये हुआ क्या , लखनउ से नौकरशाह का आदेश आया तो बुलंदशहर के एसपी को भी नतमस्तक होना पडा । लेकिन इसके समानातंर जरा ये भी समझे कि अक्सर सत्ता ही अपने अनुकुल परिस्थितियो को बनवाने के लिये नौकरशाह को निर्देश देती है । नौकरशाह नीचेल स्तर पर आदेश देता है । और जब जांच होती है तो नौकरशाह को ही जेल होती है ।
ये आप क्या कह रहे है प्रसून जी ... अब स्वयसेवक बोले । मैने भी तपाक से कहा...कोयला घोटाले मे किसे जेल हुई । सचिव को ही ना । और कोयला सचिव ने अपनी मर्जी से तो आदेश दिये नहीं थे । फिर कोयला सचिव के पीछे आईएएस संगठन खडा हुआ ना । इसी तरह बुलंदशहर की घटना के बाद पुलिस महकमा एक होगा ना ।
तो क्या सत्ता के पास वाकई कोई विजन देश को चलाने का है ही नहीं । ये सवाल जिस मासूमियत से प्रोफेसर साहेब ने पूछा , लगभग उसी मासूमियत से स्वयसेवक महोदय का जवाब आया , विजन होता तो सोशल इंजिनियरिंग फेल ना होती । बहराइच की सांसद सावित्रीबाई फुले ने बीजेपी छोड दी । कुशवाहा 11 दिसबंर का इंतजार कर रहे है । इंतजार किजिये ये कतार बढती जायेगी ....क्यों ,  क्योकि दलित अगर बीजेपी को वोट देगा नहीं और हिन्दु के नारे से समाज पाटने के जगह अगर बंटेगा तो फिर बीजेपी के साथ कौन खडा होगा ।इसलिये आप इंतजार किजिये पांच राज्यो के परिणाम संघ के लिये भी सीख होने वाले है और सुविधाभोगी होकर संघर्ष करने की बात कहने वालो के लिये आखरी किल ठुकने वाली है ।
मगर एक जानकारी दिजिये दलित वोट जायेगें किधर...क्यो ? ये सवाल आपके जहन में क्यो आया । मेरे जहन में ये सवाल तभी आ गया था जब मायावती ने काग्रेस के साथ मध्यप्रदेश या छत्तिसगढ या राजस्थान में कोई समझौता नहीं किया । और अगर इन राज्यो के चुनाव के फैसले में मायावती हाशिये पर चली जाती है..जो एक्जिट पोल में नजर भी आ रहा है  तो फिर इसका एक मतलब ये भी होगा कि दलित भी अब मायावती के भरोसे नहीं है ।
तब तो दो सवाल और होने चाहिये । अब प्रोफेसर साहेब बोले । क्या ? पहला सरस्वती फुले बीजेपी छोड किस पार्टी का दामन थामेगी । और दूसरा क्या राज्यो के चुनाव संकेत होगें कि काग्रेस के पास अपने पारंपरिक वोटबैक लोट रहे है ।
महत्वपूर्ण सवाल है .... क्योकि फुले अगर काग्रेस में चली जाती है तो मान कर चलिये मायावती की काट काग्रेस को मिल गई । क्योकि सरस्वती फुले फायरब्रांड भी है और मायावती की घटती साख के बाद विकल्प भी । फिर बीजेपी से अगर मायावती ने सौदाबाजी कर अगर चुनाव लडा है जो लगातार मैसेज जा रहा है कि 2019 से पहले मायावती डर और पद दोनो के लालच से अलग चुनाव लडी तो राज्यो में काग्रेस की जीत तमाम क्षत्रपो को संकेत दे देगी कि काग्रेस को अब महागठबंधन के लिये मेहनत नहीं करनी है बै बल्कि क्षत्रप ही काग्रेस की शर्ते पर साथ जुडे ।
ये तो सौदेबाजी में ही पता चलेगा । स्वयसेवक का ये कहना था पर अगले ही पल खुद स्वयसेवक महोदय ही बोल पडे...ठीक कह रहे है आप अगर काग्रेस खिल रही है और मोदी ढल रहे है तो फिर सौदेबाजी के हालात काग्रेस तय करने लगेगी । 
इसका मतलब है बीजेपी के बुरे दिन आने वाले है । बात प्रोपेसर साहेब ने की लेकिन स्वयस्वक महोदय मेरी तरफ देखते हुये बोले , बुरे दिन तो देश के आने वाले है । खजाना खाली है । संवैधानिक संस्थाये तार तार है । सीबीआई पर सुप्रीम कोर्ट के सवाल सत्ता की मनमर्जी तले संविधान की ही आहुति देख रहे है ।
आज आपके तेवर बेहद कडे है .... खास कर मोदी सत्ता को लेकर ....और आपके सवाल सिर्फ आप तक सीमित है या संघ परिवार की भीतर भी कसमसाहट है .... मैने एक साथ कई सवाल दागे..लेकिन सवालो को सुनने के बाद स्वयसेवक महोदय सिर्फ इतना ही बोले...संघ कोई राजनीतिक संगठन नहीं है लेकिन अब संघ पर राजनीतिक हमले हो रहे है और संघ की कार्यशैली सास्कृतिक संगठन वाली है तो आपको बाहर से संघ खामोश ही दिखायी देगा लेकिन स्वंयसेवक दर स्वयसेवक के भीतर ये सवाल तो है कि आखिर मोदी युग में संघ सुविधायुक्त होकर  वैचारिक तौर पर सिकुडता क्यो चला गया । फिर जिस तर्ज पर सत्ता ने तमाम संस्थानो के जरीये विरोधियो को डराया उसकी जद में बीजेपी से ही जुडे लोग भी आ गये ।
ये तो आप नई बात कह रहे है ..कि डराने के दाये में बीजेपी भी आ गई ...कोई उदाहरण ..मुझे बोलना पडा ..
है ना ...आपसे इससे पहले भी बीजेपी के एक शख्स विभव उपाध्याय के बारे में जिक्र हुआ था ।
जी वहीं जो पहली बा 2005 में मोदी जी को जापान ले गये थे ...
जी ..आपकी यादश्त काफी मजबूत है प्रसून जी...उन्ही विभव उपाध्याय को ईडी नोटिस भेजती है । उनके करीबियो पर डीआईआई छापा मारती है ।
ये तो आप नई जानकारी दे रहे है ....
जी क्या कहे और तो और हरियाणा में तो संघ से जुडे खट्टर सीएम है लेकिन दिल्ली की सत्ता जब सीएम पर भी अपने अधिकारियो के जरीये सुपर सीएम बैठा देती है तो फिर सीएम इमानदार हो कर भी क्या करेगा ..... क्यों
अब देखिये जीएसटी के इंसपेक्टरो तक को इतनी ताकत के साथ भ्र्ष्ट्राचार करने का अधिकार मि गया है कि फरीदाबाद में बीजेपी से ही जुडे एक व्यापारी को वही का जीएसटी अधिकारी नहीं बख्शता ।
तो क्या बीजेपी की भी नहीं चलती या फिर वह अधिकारी ही बेहद महत्वपूर्ण है ।
अरे नहीं जनाब .... मै तो सिस्टम के करप्ट होने की व्याख्या कर रहा हूं ... अधिकारी छोटा सा है ...शायद उसका नाम कोई गोल्डन जैन है । बेहद भ्रष्ट्र है ....सभी जानते है । लेकिन सिस्टम ही जब किसी को भी राजनीतिक दवाब के तहत परेशान करने वाला बना दिया जायेगा तो होगा क्या ...हर करप्ट व्यक्ति खुद को मोदी के ग्रूप का बतायेगा ।  ये लकीर फरीबाद से लेकर चडीगढ तक चली जायेगी..फिर खट्टर कितने भी इमानदार स्वयसेवक रहे हो ..होगा क्या
जारी........ 


13 comments:

अभिषेक पाण्डेय सांकृत्यान said...

सत्य है

Rashtra Samvad News said...

कड़वा सच

Unknown said...

कठोर सत्य

Unknown said...

Desh es waqt khatre me hai

Leaders Talk said...

Truth

Unknown said...

Great analysis

Anil Saraswat said...

प्रसून जी जो भी बोलते हैं सही बोलते हैं। सही इसलिए की काफी सोच विचार और अध्ययन करने के बाद। जब एंकर के रूप में टीवी पर बोलते है तो जीवित सबूतों के साथ। जब केंद्र की सरकार इतनी विवश हो जाये कि प्रसून जी को इस्तीफा देना पड़े अर्थात चैनल ही मजबूर हो जाये इस्तीफा लेने के लिए तो प्रसून जी की काबलियत पर सवाल उठाना बेमानी ही माना जायेगा। प्रसून जी ही एक व्यक्ति थे जिनका शो देखने के लिए बुद्धिजीवी ठीक समय पर टीवी के सामने बैठ जाता था। उल्लेखनीय है की इनसेट तक से छेड़छाड़ कर दी। चैनल की टी.आर.पी, दोनों-दिन बढ़ती गई। समूचे लेख का निचोड़ यह है कि वाकई भाजपा को दो बोरी सीमेंट जनमानस रूपी बांध के सैलाव को रोक नहीं सकेगा। 11 दिसंबर के बाद कांग्रेस के कदम सत्ता की और बढे तो राहुल पप्पू नहीं रहा। यह 5 चुनाव देश की राजनीती की धारा खुलकर व्यक्त कर देंगे। स्वम सेवक संघ भी जमीनी स्तर पर लाचार ही दिखाई देगा। जितनी भी शक्ति भाजपा चुनाव में लगा सकती थी इन चुनावों में लगा चुकी है। बुलंदशहर की घटना में हिन्दू ने हिन्दू को ही क्षति पहुंचाई है। जब हालात इस कदर बिगड़ जाएँ की हिन्दू ही हिन्दू की जान ले रहा है तो हिन्दू इस नीति के बिरोध में ही खड़ा होगा। यह दिशा किसी भी सोच से सही नहीं है। मैंने एक न्यूज़ पर यह प्रतिक्रिया दी थी अल्प समय में 22 व्यक्तियों ने लाइक किया था। हिन्दू भाजपा के प्रति कितना झुकेगा यह जीवित प्रश्न है।

Unknown said...

Sahi hai!

शर्म क्यों मगर हमें आती नहीं said...

ye swayamsevak kaun se hain...koi hint to deni thi prasoon ji

Unknown said...

desh ko Aisi hey Patra karo ki jarurat hi Vajpayee thank you

Unknown said...

इस लेख मे लिखा एक-एक बात सत्य है।शायद इसलिए पूण्य प्रसुन बाजपेयी आपको रोकने की लगातार कोशिश की जा रही है।

Sanket Raghuvanshi said...

अगर आप का आरोप सही नहीं निकला यानि कोई दंगा नही हुआ तो क्या लिखित में माफी मांगेंगे संघ परिवार से? कुछ भी मनघडंत लिखना है

P.p.vajpeyi said...

सत्य प्रताडित हो सकता है पराजित नही
बहुत सुन्दर प्रसून जी