Saturday, February 6, 2010

राष्ट्रपति के मायके का हाल, पार्ट-2

चालीस करोड़ की ज़मीन पर लाख रुपये का टेंडर और किसान को मुआवजे में दिये सवा चौदह लाख

सरकार से कौन लड़ सकता है ? पहले भी कुछ नहीं कर पाये और अब भी कुछ नहीं कर सकते। आमदार-खासदार तो दूर सरपंच भी धोखा दे गया तो किसे भला-बुरा कहे। अब सरकार ही दलाल हो जाये तो किसान की क्या बिसात। एक शास्त्री जी थे, जिन्होने जय जवान- जय किसान का नारा दिया था। उस वक्त देश पर संकट आया था तो पेट काट कर हमने भी सरकार को दान दिया था। मेरी बीबी ने उस समय अपने गहने भी दान कर दिये थे। लेकिन अब सरकार ही हमें लूट रही है। किसानी से भिखारी बन गये हैं। बेटा-बहू उसी जमीन पर दिहाड़ी करते हैं, जिस पर मेरा मालिकाना हक था। जिस जमीन पर मैने साठ पचास साल तक खेती की। परिवार को खुशहाल रखा। कभी कोई मुसीबत ना आने दी। सभी जानते थे कि जमीन है तो मेहनते से फसल उगा कर सर उठा कर जी सकते हैं। लेकिन सरकार ने तो अपनी गर्दन ही काट दी.....एक सांस में सेवकराम झांडे ने अपने समूची त्रासदी को कह दिया और फकफका कर रोने लगे।

बेटे, बहू, नाती पोतो के लिये यह ऐसा दर्द था कि किसी को कुछ समझ नहीं आया कि इस दर्द का वह इलाज कैसे करें । 72 साल के सेवकराम झांडे की जिन्दगी जिस जमीन पर अपने पिता और दादा के साथ खडे होकर बीती और जिस जमीन के आसरे सेवकराम खुद पिता और दादा-नाना बन गये उसी जमीन का टेंडर सरकार निकाल कर बेच रही है। असल में नागपुर में मिहान-सेज परियोजना के घेरे में 6397 हेक्टेयर जमीन आयी है और इस घेरे में करीब दो लाख किसानों के जीने के लाले पड़ गये हैं। क्योंकि महज डेढ़ लाख रुपये एकड़ मुआवजा दे कर सरकार ने सभी से जमीन ले ली है। लेकिन पहली बार एमएडीसी यानी महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कों लिमेटेड की तरफ से अखबारो में विज्ञापन निकला कि 8 एकड जमीन 99 साल की लीज पर दी जा रही है। और विज्ञापन में जमीन का जो नक्शा छपा वह मिहान-सेज परियोजना के अंदर का है और उसमें जिस जमीन के लिये टेंडर निकाला गया असल में बीते सौ वर्षो से उस जमीन पर मालिकाना हक सेवकराम झाडे के परिवार का रहा है। एमएडीसी,वर्ल्ड ट्रेड सेंटर बिल्डिग, कफ परेड, मुबंई की तरफ से निकाले गये राष्ट्रीय अखबारों में अंग्रेजी में निकाले गये इस विज्ञापन को जब हमने सेवकराम को दिखाया और जानकारी हासिल करनी चाही कि आखिर उनकी जमीन अखबार के पन्नो पर टेंडर का नोटिस लिये कैसे छपी है, तो हमारे पैरों तले भी जमीन खिसक गयी कि सरकार और नेताओ का रुख इतना खतरनाक कैसे हो सकता है।

विज्ञापन देखकर छलछलाये आंसुओं और भर्राये गले से सेवकराम ने बताया कि 2003 में पहली बार खापरी गांव के सरपंच केशव सोनटक्के ने गांववालो को बताया कि उनकी जमीन हवाई-अड्डे वाले ले रहे हैं। क्योंकि यही पर अंतर्राष्ट्रीयकारगो हब बनना है । साथ ही वायुसेना को भी इसमें जगह चाहिये होगी इसलिये जमीन तो सभी की जायेगी। उसके कुछ महिनों बाद गांव में बीजेपी के आमदार चन्द्रशेखर बावनपुडे आये । उन्होने नागपुर के हवाई-अडड् की परियोजना की जानकारी देते हुये कहा कि गांववाले चिन्ता ना करें, उन्हें वह मोटा मुआवजा दिलवायेंगे। फिर 2004 में बीजेपी आमदार के साथ नागपुर के ही बीजेपी के प्रदेशअध्यक्ष नीतिन गडकरी आये। उन्होंने कहा कि जो मुआवजा मिल रहा है, वह ले लें, बाद में और मिल जायेगा । 2004 में ही चुनाव के वक्त कांग्रेस के खासदार विलास मुत्तेमवार भी गांव में आये और उन्होने भरोसा दिलाया कि कि मुआवजा अच्छा मिलेगा और सरकार ही जब देश के लिये योजना बना रही है और वायुसेना भी इससे जुड़ी है तो कोई कुछ नहीं कर सकता। क्योकि सरकार देशहीत में तो किसी की भी जमीन ले सकती है। और 2005 में खापरी गांव के तीन हजार से ज्यादा लोग जो जमीन पर टिके थे उनकी जमीन सरकार ने परियोजना के लिये ले ली।

खापरी गांव की कुल 426 हेक्टेयर जमीन परियोजना के लिये ली गयी । जिसमें सेवकराम झांडे और उनके भाई देवरावजी झांडे की 11 एकड जमीन भी सरकार ने ले ली। मुआवजे में सरकार ने एक लाख 40 हजार प्रति एकड़ के हिसाब से सेवकराम के परिवार को 14 लाख 35 हजार रुपये ही दिये। क्योंकि सरकारी नाप में 11 एकड़ जमीन सवा दस एकड़ हो गयी। लेकिन जमीन जाने के बाद सेवकराम के परिवार पर दुखों का पहाड़ दूटा । भाई देवराजजी झांडे की मौत हो गयी । सेवकराम की बेटी शोभा विधवा हो गयी। दामाद की मौत इसलिये हुई क्योकि खेती की जमीन देखकर उसने सेवकराम के घर शादी की। जमीन छिनी तो समझ नही आया कि किसानी के अलावे क्या किया जाये। भरे-भूरे परिवार को कैसे संभाले उसी चिन्ता में मौत हो गयी। सेवकराम के तीनो बेटों के सामने भी रोजी रोटी के लाले पड़ गये। छोटे बेटे विष्णु ने किराना की दुकान शुरु की। बीच वाले बेटे विजय ने दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार का पेट पालना शुरु किया तो बडे बेटे वासुदेव को उसी मिहान योजना में काम मिल गया जिस योजना में उसकी अपनी जमीन चली गयी। घर की बहु और बडे बेटे की पत्नी सिंधुबाई ने भी मिहान में नौकरी पकड़ ली । तीनो बेटे और विधवा बेटी से सेवक राम को 12 नाती-पोटे हैं। सभी कमाने निकलते है तो घर में खाना बन पाता है , जबकि पहले सेवकराम किसानी से ना सिर्फ अपने परिवार का पेटे पालते बल्कि शान से दूसरो की मदद भी करते। लेकिन जमीन जाने के बाद सेवकराम ने अपने परिवार का पेट पालने के लिये पशुधन भी बेचना पड़ा। बीस भैंस और नौ गाय बीते दो साल में बिक गयीं। एक दर्जन के करीब बकरियां भी बेचनी पड़ी। आज की तीरीख में सेवकराम के घर में संपत्ति के नाम पर तीन साइकिल और एक गैस सिलिंडर है, जो 14 लाख 35 हजार मिले थे वह खर्च होते-होते 80 हजार बचे हैं। जबकि सेवकराम के भाई देवराजजी झांडे के परिवार की माली हालत और त्रासदीदायक है। गांधी भक्त देवराजजी की मौत के बाद घर कैसे चले इस संकट में बडा बेटा शंकर दारु भट्टी में काम करने लगा है तो छोटा बेटा राजू नीम-हकीम हो गया । इसके अलावे तीन बेटियों की किसी तरह शादी हुई और फिलहाल परिवार में 15 नाती-पोतो समेत 23 लोग हैं, जिनकी रोटी रोटी के लिये हर समूचे परिवार को मर-मर कर जीना पड़ता है। आर्थिक हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि घर का कोई बच्चा स्कूल नहीं जाता।

वहीं सेवकराम झाडे की जमीन पर निकले टेंडर फार्म की कीमत ही लाख रुपये है। यानी जो भी टेंडर भरेगा उसे लाख रुपये वापस नहीं मिलेंगे। चूंकि सेवकराम के 11 एकड़ में से 8 एकड़ जमीन रिहायशी इलाके में तब्दील करने की नायाब योजना एमएडीसी वालो ने बनायी है और इस तरह खेती की जमीन लेकर रियल स्टेट सरीखी ब्रिक्री की जा रही है, जो सरकार के ही नियम-कायदे के खिलाफ है जो सरकार को ही दलाल में तब्दील कर रही है। चूंकि यह जमीन हवाई-अड्डे से एकदम सटी हुई है। नागपुर में बीसीसीआई के क्रिकेट मैदान से सिर्फ दो किलमीटर दूर है और जमीन के चारों तरफ देश के टाप उघोग और कैरपोरट जगत से जुडे संस्थानों को खड़ा किया जा रहा है तो जमीन की कीमत सरकार को कितनी मिल सकती है इसका अंदाजा इस बात से लग सकता है कि 2005 में जब सेवकराम को प्रति एकड एक लाख 40 हजार रुपये मुआवजा मिला तब इस जमीन का बाजार भाव ढाई करोड़ रुपए प्रति एकड़ हो चुका था, जो अब चार करोड़ तक पहुंच चुका है। लेकिन इस करोड़ों के खेल में हर उस शख्स को लाभ दिया गया, जिसने किसानों से जमीन छीनने में मदद की। मसलन खापरी गांव के सरपंच केशव सोनटक्के, जिनके कहने पर सेवकराम ने पहली हामी भरी थी, उसे हिंगना औघोगिक त्क्षेत्र में 30 एकड़ माइनिंग का पट्टा फ्री में दे दिया गया। इसी तरह कुलकुही और तलहरा के 9625 परिवारों से 844 हेक्टेयर जमीन सरकार को दिलाने वाले सरपंच प्रमोद डेहनकर को भी 30 एकड़ माईनिंग का पट्टा फ्री में दिया गया। जबकि बीजेपी के नागपुर ग्रामीण क्षेत्र की नुमाइन्दगी करने वाले कामठी के आमदार चन्द्शेखर बावनपुडे के काले-पीले चिठ्ठे को संभालने वाले सुनील बोरकर को भी 30 एकड़ माइनिंग का पट्टा देने के अलावे सड़क और पुल के ठेके मिल गये। नागपुर से कांग्रेस के सासद के भी पौ बारह कई योजनाओं में करीबियो को ठेके दिलाकर हुये। यानी बीते सौ सालों से जो पटवारी हल्का नं-42 में खापरी गांव में सेवकराम की जमीन थी वह 2005 में अभी तक किसी की नहीं है लेकिन लाख रुपये के टेंडर के 15 फरवरी को बंद होने के बाद 99 साल के लिये करीब 35 से 40 करोड देने के बाद ऐसे किसी भी धंधेबाज की हो जायेगी, जो 40 करोड़ से 400 करोड़ बनाना जानता हो। और मिहान-सेज को लेकर जो धंधा जमीनों की लूट का चल निकला है उसमें माना यही जा रहा है कि किसानों को 50 करोड बांटकर सरकार और नेताओं ने 5 लाख करोड़ का धंधा किया है, जो परियोजना के आने से पहले का है।

और मनमोहन इक्नामिक्स यही कहती है कि जिस धंधे में मुनाफा हो वही बाजार नीति और देश की नयी आर्थिति नीति है फिर अपराध कैसा ।

14 comments:

Akanksha Yadav ~ आकांक्षा यादव said...

व्यवस्था को असली चेहरा दिखाती पोस्ट. पर हर कोई मौन है.
___________
शब्द-शिखर पर इस बार काला-पानी कहे जाने वाले "सेलुलर जेल" की यात्रा करें और अपने भावों से परिचित भी कराएँ.

AAINA said...

Aapki timing bilkul sahi nahi hai.N aalochna n prasansa par sawal jaroor hai ki kyo jab bhi aapko aise bindoowo ko uthane ka awasr milta hai to aap har baar chuuk jate hai.Pichle kuchh mahino me aap jitni bar bhi Maharasastra gaye,kya kiaa aapne, sawal karne ke tarike badal jaate hai,jo sawal hona chahiye wo prasn hi gayab ho jate hai. Bhari bhid me jab aise prasno ko uthaya jata hai to uska kuchh asar bhi hota hai. Akhir kyo har neta tippadi karne ke liye ya interview waigara ke liye aasani se sahmat ho jate hai, kyoki unhe sawalo se dar nahi lagata. Jis din sawalo se dar lagne lagega us din ye neta jimedar ban jayege phir har koi sina tankar hot seat par nahi aayega ,wahi aayega jisme viswas hoga. Sabhi padhte hai, khijh se bhar jaate hai ,par uahi jimmedar log jab saamne ho aur ham unhe tarkik sawalo se bhi rubaroo n kara paaye to phir aise parisram ka kya arth.

sudhanshu chouhan said...
This comment has been removed by the author.
sudhanshu chouhan said...

सर, यह तो होता ही आया है। अगर कहीं महल बनता है, तो उसके इतिहास में ज़रूर वहां कोई झोपड़ी ही होती है और महल बनाने में ख़ून-पसीना भी उसी मज़दूर का होता है जिसकी झोपड़ी होती है।
ऐसा होता आया है और आगे भी होगा, क्योंकि मार्क्स और लेनिन बार-बार नहीं पैदा होते।

amritwani.com said...

kya dhund nikala he aap ne

राज-नीति said...

गांव के सरपंच से लेकर आपने कांग्रेस व भाजपा के नेताओं का जिक्र किया इसमें। कि उन्होंने इस दलाली के खेल में कितना कमाया, क्या-क्या बनया, लेकिन आपने यह नहीं बताया कि हजारों करोड़ रुपए के धंधों के मालिक और अभी हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने इस खेल में कुछ कमाया है कि नहीं..।
nemishhemant@gmail.com

anjule shyam said...

bas in halaton mein sir ak bikalp bacha hai......nakslaite ka chahe koi ise acha kahe ya bura...hamari sarkar bas bajar ke liye kam kar sakti baki aamadmi mar kun na jaye wase bhi ye log uske liye kewal paresani hi khadi karte hain.......

सुशीला पुरी said...

manmohan ki maya!!!!!!!!!!

रंगनाथ सिंह said...

इस रात की सुबह नहीं !

RISHIKESH said...

सर यह एक ब्लाग की कथा न बन कर रह जाए..उम्मीद है यह टेलिविजन के माध्यम से एक बङे वर्ग तक पहुँचेगा..

बवाल said...

पुण्य भाई,
आपकी बात से असहमत होने की तो बनती ही नहीं है। बहुत वाजिब कहते हो आप इसमें कोई शक नहीं। मगर यदि अपना समझते हो तो आपसे एक बात बहुत दिनों से कहना चाहते थे हम। और वो ये कि यह ब्लॉगिंग है और इसमें ख़ुद को पढ़वाने के लिए दूसरों को पढ़ना और टीपना भी ज़रूरी होता है। इसे चैनल की स्टाइल में न करके हम सबके साथ शामिल हों। आप तो हमारे वैसे भी दुलारे हैं। मगर दूसरों को भी पढ़ें समझें। थोड़ा वक्त ही तो निकालना है भाई।

Mukesh hissariya said...

जय माता दी,
हमलोगों ने "पीड़ित मानव की सेवा "को अपना लक्ष्य मानकर माँ वैष्णो की कृपा से एक मंच माँ वैष्णो देवी सेवा समिति ,पटना (व्यावासिओं का एक ग्रुप) की शुरुआत की है .समिति ने ये निर्णय लिया है की हमलोग 16/03/2010 को माता का एक जागरण अनुराधा पौडवाल और लक्खा जी के द्वारा पटना के गाँधी मैदान में में करवा कर अपने सारे लक्ष्यों को पाने की कोशिश की शुरुआत करेंगे '।
हमलोगों ने १६/०३/२०१० के जागरण में ११ लोगों को सम्मानित करने का निर्णय लिया है.श्री किशोर कुनाल,श्री आनंद जी के साथ हमलोग आपको भी सम्मानित करना चाहते है.
MUKESH KUMAR HISSARIYA

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Sankar shah said...

PRASUN JI APKE LEKH SACH MAIN BAHUT ALAG HOTA HAI....

Shesh M said...

Really to all! Dis one is an fantastik statement and it may be supportable by all of us and dis will be continue till last day of nature. Only poor peoples will face different kinds of problem even they did to much hard work respect to other zone peoples.