Saturday, July 28, 2012

भीड़ नहीं ,पलते हुये सपनों से तौलें जंतर-मंतर को


वही जंतर-मंतर। वहीं अन्ना टीम। वहीं मांग। रास्ता कैसे निकलेगा। सुबह से आधी रात तक हरी दरी पर बैठे बदलते चेहरों के बीच यह एक सामान्य सा सवाल है। लेकिन वह सरकार। वही नेता। वही ताने। यह अनशन के दो दिन बाद उसी हरी दरी पर बैठे लोगों के नये सवाल है। तो रास्ता कैसे निकलेगा। अब तो सरकार के चेहरे खुलकर कहने लगे है कि दम है तो चुनाव लड़ लो। और मंच पर अनशन किये टीम अन्ना के सदस्यों के बीच भी यह सुगबुगाहट चल निकली है कि अब तो राजनीतिक विकल्प की बात सोचनी होगी। तो क्या अनशन से आगे का रास्ता पहली बार अनशन करते हुये दिखायी देने लगा है। शायद हां। शायद नहीं। क्योंकि रास्ता राजनीतिक चुनौती की दिशा में जाता जरुर है लेकिन चुनाव का आधार सिर्फ अनशन से या जनलोकपाल की मांग के आसरे खोजना नामुमकिन है। बाहरी दिल्ली से पहुंचे रामनारायण हाथ में राशन दुकान से कैरोसिन तेल पाने की अर्जी है। राजस्थान से आये अशोक के हाथ में कागजों का पुलिन्दा, जिसमें उनकी जमीन पर सरकार ने ही बिना मुआवजे और सूचना दिये कब्जा कर लिया। बुदेलखंड से आई लक्ष्मी अपंग है लेकिन उसे दस्तावेजों में अपंग नहीं माना गया तो उसे नौकरी भी नहीं मिल रही। जाहिर है हरी दरी पर थके हारे जो चेहरे लगातार अपनी अपनी गठरी संभाले बैठे हैं, उनके भीतर अन्ना टीम को लेकर कोई उलझन नहीं है। वह माने बैठे हैं कि सरकार को अन्ना के संघर्ष के सामने झुकना होगा और सरकार झुकेगी या समझौता करेगी तो उनके लिये भी रास्ता निकलेगा। तो क्या राजनीतिक विक्लप की तैयारी के लिये अन्ना टीम को भी अब देश के असल हालात को अपने संघर्ष का हिस्सा बनाना होगा। शायद यह गुफ्तगु शुरु हो चुकी है।

मंच के बगल में टेंट से घेरकर दो बिस्तर बिछाये गये हैं। जहां हर आधे घंटे के अंतराल के बाद केजरीवाल, सिसोदिया और गोपाल राय बारी बारी से आकर लेटते हैं। क्योंकि प्राकृतिक इलाज करने वाले डाक्टरों ने इन्हे सुझाव दिया है कि अगर आप मंच से बोले कम और काफी देर लेट कर आराम करे तो अनशन दस दिन तो आराम से चल सकता है। और आराम के इस कमरे में ही बीच बीच में अन्ना हजारे भी अनशन कर रहे अपनी टीम के सदस्यों की पीठ ठोंक कर हौसला भी लगातार दे रहे हैं। लेकिन महत्वपूर्ण अब आराम के कमरे में बनते भविष्य के सपने हैं। जो खुद धीरे धीरे बुने जाने लगे हैं। सरकार चार दिन भी अनशन को लेकर नहीं देना चाहती है। जनता ने तो 60 बरस सत्ताधारी नेताओ को दे दिये। यह मंच के नीचे बैठे भोला साहू का सवाल है। बीते तीन दिनो में हर सुबह हरी दरी पर आकर बैठना। घर से ही खाने की पोटली ले कर आना। नारे लगाना। झूमना । और आधी रात को करोलबाग के अपने घर लौट जाना। 82 बरस की उम्र में जंतर मंतर पर आकर बैठने के पीछे कोई बड़ी वजह। इस सवाल पर भोला साहू की आंखों में आजादी का दिन ही आ जाता है। जो सपने पाले गये वह टूटे या बिखरे इससे इतर सपने अब भी बरकरार है और भारत को सपने की जरुरत है। जो जंतर मंतर पर उन्हें बार बार दिखायी देती है। लेकिन इस बार भीड़ नहीं है। लोग कम हैं। क्यों भीड को खोज रहे हैं आप। क्या घरों में अपने काम में उलझे लोगो के भीतर सपने नहीं पल रहे हैं। और अगर भीड ही सबकुछ है तो फिर दिल्ली की सड़कों पर 84 में क्या हुआ था। तब तो भीड़ ही भीड़ थी। लेकिन उस भीड़ की हरकतों पर कांग्रेस ने माफी क्यों मांगी। अयोध्या की भीड़ पर वाजपेयी ने माफी क्यों मांगी। यह सब कहते हुये भोलाराम के चेहरे पर कोई गुस्सा नहीं बल्कि सुकून ही रहा। पीठ पर हाथ रखकर बोले, सपने जब पलते हैं तो वह भीड़ की शक्ल में सामने नहीं आते। तो क्या भीड को लेकर जो आवाज मीडिया लगा रहा है वह बेमानी है। जो सवाल सरकार के मंत्री उठा रहे है और कम भीड़ देखकर नेताओ ने कसीदे गढने शुरु कर दिये हैं। क्यों इससे अन्ना हजारे बेखबर है। मंच के नीचे आराम के कमरे में इस सवाल का जवाब केजरीवाल के पास अगर रणनीति को लेकर है तो अन्ना हजारे भोलाराम की तरह इसे अपने सपनो में ही तौलते हैं।

अन्ना का साफ कहना है कि अब देश जाग चुका है और जागा हुआ देश बार बार भीड़ नहीं बनता। वहीं केजरीवाल यह मान रहे है कि भीड़ से आंदोलन को तौलना मीडिया और सरकार के लिये सबसे बडी भूल और आंदोलन के लिये सबसे लाभ वाला है। क्योंकि वक्त बीतना तो अभी शुरु भी नहीं हुआ। अब लोग आयेंगे तो वही इन्हें समझायेंगे कि शुरु में ही हमले के हथियार बेकार कर देने का मतलब क्या होता है। लेकिन अब राजनीतिक लडाई की बिसात बिछनी शुरु होगी। मंत्रियों और नेताओ के वही वक्तव्य सरकार को भारी पड़ेंगे जो हमें वह चुनाव लडने के लिये उकसाने वाले दे रहे हैं। केजरीवाल को भरोसा है कि चुनाव की बिसात सरकार ही बिछा रही है और पहली बार अब आम लोग भी सोचेंगे कि क्या वाकई चुनाव में जीत-हार ही देश का भविष्य है। ऐसे में अन्ना तो अनशन पर बैठ जायेंगे और उसके बाद निर्णय तो लोगो को लेना होगा कि अब वह सरकार से जनलोकपाल मांगे या सरकार को बदलने के लिये राजनीतिक तौर पर सोचना शुरु कर दें।

जंतर मंतर पर राजनीतिक तौर पर सोचने का यह ककहरा कैसे हवा में धुल गया है इसका अंदाज हाथ में हाथ डाल कर मंच पर जाने से रोकने वाले युवा वालेटिंयरो के इन सवालो से भी समझा जा सकता है जो समूह में आते लोगो के धक्के खाते हुये यह कहने से नहीं चूक रहे कि अब धक्का तो शहर शहर, गांव गांव खाना है। मगर संसद नहीं देखना है। वहीं मंच के पीछे जिस घर में नहाने और शौचालय की व्यवस्था है, वहां अन्ना को आते जाते देखकर करीब 70 बरस की रमादेवी भी कहने लगी हैं, अन्ना ने अनशन शुरु किया तो हम भी एक वक्त का खाना छोड देंगे। जैसे शास्त्री जी के कहने पर 1965 में छोडा था। तब तो युद्द था। तो यह भी युद्द से कम नहीं है ।

13 comments:

kartik balwan said...

आग सीने में लगी है.... ये बालों का रंग ढूंढने में लगे हैं...

चहूं और निराशा का ऐसा माहौल बनाया जा रहा था.. जैसै पहले सब बेहतरीन था..
बहुत बहुत आभार ... इस मुहीम के लिए...
उस बुजूर्ग व्यक्ति और कुछ पागलों का समर्थन करने के लिए... जो देश की नाकारा जनता के लिए शिखंडियों से लड़ने चले.. हमारी अगली पीढियों के लिए ये इतिहास बनेगा.... उस दौर में ये सब उनके रौंगटे खड़े कर देगा..

ABHISHEK MISHRA said...

Sir it was ought to happen...
now people actuly started beliving that anna movement is not going to be a sucess.
it actuly happned with bjp also when it did'nt did any thing for Ram Mandir even after being in power for 6 years.that time also people started beliving that bjp will not do any thing for ram mandir.
the other thing here is that anna has started taking of a political alternative, I am quite sure anna can not win a election. anna for a political impact should support either NDA or UPA for that matter

ABHISHEK MISHRA said...

Sir it was ought to happen...
now people actuly started beliving that anna movement is not going to be a sucess.
it actuly happned with bjp also when it did'nt did any thing for Ram Mandir even after being in power for 6 years.that time also people started beliving that bjp will not do any thing for ram mandir.
the other thing here is that anna has started taking of a political alternative, I am quite sure anna can not win a election. anna for a political impact should support either NDA or UPA for that matter

अमित चौधरी said...

My question is why media is not debating on the merits and demerits of Lokpal and JanLokpal? and why media is only focusing on crowd and defaming the fight against corruption? Is is planned effort?

Vishal kumar sharma said...

Sir...what i think is that team aana have forgotten there way...their anti curruption movement is now going like a political party movement...
it seems like they are not aware of their main agenda...
we can also say that anna ji real dont know the basics of leadership...becouse leadership not making followers..coz followers just walk away letting u alone....
Leadership is- to make peaple united, focused and most important thing...make them with u all the time....and for this people need inspiration of their leader.....

Raj Choudhary said...

Thats the real Version,,, thats what,, public demand,,,, thanx Bajpayee ji,, aapney sahi likha,,, Coz par kisi ki nagah nahi,, kya bheed hi tai karegi kya sach hai kya jhuth hai,,,, fir to kisi bhi sadak ko rok rahey 1000 aadmee hamesha sahi hotey hongey,,, 74 saal ka budha ghulam bharat me paida hua,, aur aazaad bharat me saans letey hue jab Luut bharastrachaar dekha,, to usney aawaaj uthayee,, aaj wo budha desh k jawano ko keh raha hai,, iss desh ko sambhaal lo,, sambhaal lo sambhaal lo

AAINA said...

DARASAL MEDIA KO WAJAN WAHI NAJAR AATA HAI JAHA BHID HOTI HAI, KOYKI NEWS KA IMPACT USASE HI TAULANE KI KOSIS KI JAATI HAI , YAHA SARKAR AUR MEDIA KE TARIKE ME KOI ANTAR NAHI. AAPKI DIKKAT SHYAD YE HAI BHI YA NAHI KI AAP APNI KALAM KO KHUL KAR AZZAD NAHI KAR PAATE.SHAYD HAMARE HI NAJRIYE ME KUCH GALTI HO KYOKI AAPKA BEBAK HONA JYADA BEHTAR LAGTA HAI. BAHARHAL,KUCH CHIJO KO HAMESA PAROCH YA APROCH RUP SE SAMARTHAN KARNA HI CHAHIYE ,TO JO KAR SAKTE HAI WO JAROOR KARIYE . WAIST YE ISSUE ITNA BHI HALKA NAHI KI AAP LEKH KO ITNA CHOTA KAR DE..APNI FITRAT KISI KE KAHNE PAR TO KABHI NAHI BADLIYEGA..

पूरण खंडेलवाल said...

अपने आप को स्वतंत्र कहने वाला मीडिया भी आज सवालों के घेरे में आ गया है और सही तरीके से मीडिया का विश्लेषण करने की भी जरुरत नहीं है बल्कि
चीख चीख कर मीडिया की हरकतें कह रही है है कि वो निष्पक्ष नहीं है !!

Diwakar jha said...

sir ab to parivartan ho kar rahega.....

Dev Singh Rawat said...

-जंतर मंतर पर कम भीड़ या टीम अण्णा को ढाल बना कर भ्रष्टाचार पर आंखे न मूदे सरकार

-भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए ठोस लोकपाल शीघ्र पारित करनेे के लिए संसद का आपातसत्र बुलाये

-टीम अण्णा के सबसे प्रमुख सदस्य अरविन्द गौड़ मंच पर दो दिन से क्यों नहीं? जनता अण्णा से कर रही है सवाल

मैं आज व कल जंतर मंतर पर चल रहे टीम अण्णा के अनशन को समर्थन देने के लिए अपने साथियों के साथ जंतर मंतर पर दोपहर से सांय आठ बजे तक था। मुझे वहां पर न केवल इससे पहले अण्णा द्वारा जंतर मंतर व रामलीला मैदान में चलाये गये तीनों आंदोलनों में सहभागी रहने के कारण इस बार लोगों के उत्साह में कमी साफ दिखी। कल के मुकाबले आज भीड़ कम थी। परन्तु टीम अण्णा के सबसे जमीनी सदस्य अरविन्द गौड, जो अपनी नाट्य मंडली के सैंकडों सदस्यों के सहयोग से पूरे देश में इस आंदोलन को सफल बनाने में अग्रणी रहे, उनका इस बार के आंदोलन में मंच से दूर रह कर जनता के बीच ही बेठे रहना, इस बात का साफ इशारा करता है कि टीम अण्णा में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। मै कल भी उनसे मिला और आज भी जब उनसे इस मामले में मैने दो टूक सवाल किया तो वे बोले मैं आम लोगों के बीच ही अच्छा लगता हॅू। परन्तु मैने कहा आप इससे पहले तीन आंदोलनों में जंतर मंतर व रामलीला मैदान में मंच में जिस प्रकार से सक्रिय नजर आते थे वह इस बार क्यों नहीं? वे हंसते हुए बोले भई मैं जनता के बीच रहने का आदी हूॅ परन्तु उनके मंच पर न जाने से एक बात साफ हो गयी कि वे टीम अण्णा के कर्णधारों से उस प्रकार से अपने आप को सहज नहीं पाते हैं जिस प्रकार पहले थे। न जाने टीम के प्रमुख अण्णा हजारे को यह बात क्यों नहीं खल रही है कि अरविन्द गौड़ जैसे जमीनी व मुद्दे से प्रतिबंद्ध प्रमुख सदस्य क्यों मंच पर नहीं आ रहे हैं? टीम अण्णा के प्रमुख होने के कारण अण्णा हजारे का यह प्रथम दायित्व बनता है कि वे टीम के महत्वपूर्ण सदस्यों को मंच पर एकजूट दिखायें। यहां अरविन्द गौड़ के अलावा न्यायमूर्ति हेगडे का न दिखाई देना लोगों के जेहन में कई भ्रम पैदा करता है। इन्हीं भ्रमों के कारण ही निंरंतर जनता का मोह भंग हो रहा है, इसी कारण इस मांग से सहमत होने व भ्रष्टाचार से निजात पाने की प्रचण्ड इच्छा होने के बाबजूद आम जनमानस टीम अण्णा के अनशन आंदोलन में पहले तीन समय के आंदोलनों की तरह आंदोलन में भाग लेने के लिए नहीं उमड़ रहा है। वहीं सरकार की मंशा भी टीम अण्णा को इस बार थकाने की रणनीति की है। सरकार को मालुम है कि टीम अण्णा के तीन सदस्यों में से दो सदस्य अरविन्द केजरीवाल व मनीष सिसोदिया अपने स्वास्थ्य कारणों से लम्बे समय तक अनशन नहीं कर सकते हैं। केवल गोपाल राय ही दस दिन की सीमा को पार कर सकते है। हाॅं अगर अनशन करने में महारथ हासिल अण्णा हजारे अगर अपनी घोषणा के तहत अनशन पर बेठ जाते है। तो सरकार को जरूर असहज स्थिति का सामना करना पडेगा। सरकार को यह जरूर समझ लेना चाहिए कि यह केवल टीम अण्णा या चंद लोगों का मामला नहीं अपितु यह देश के वर्तमान व भविष्य की रक्षा के लिए जरूरी है कि भ्रष्टाचार पर तत्काल अंकुश लगाने के लिए कठोर लोकपाल कानून बनाया जाय।

टीम अण्णा भले ही टीम अण्णा में लाख कमियां हो या टीम अण्णा के अनशन में लोग राष्ट्रीय धरना स्थल जंतर मंतर में पहले की तरह न उमड़ रहे हों, परन्तु आज देश का हर देश भक्त चाहता है कि देश की सरकार व तमाम राजनैतिक दल देश की पूरी व्यवस्था पर दीमक की तरह तबाह कर रहे भ्रष्टाचार पर अविलम्ब अंकुश लगाने के लिए कठोर लोकपाल कानून बनाये।--- www.rawatdevsingh.blogspot.com

Rupchandra Upadhayay said...

वाकई ,बात बहुत ही गंभीर है ..लोकतंत्र में क्या भीड़ ही सब कुछ है ,मुद्दे कुछ भी नही ?और अगर मुद्दे गौण है तो संसद में बहस ,चर्चा क्यों होती ,भीड़ ही तय कर दे सब -कुछ ,और भीड़ नही है तो क्या यह मान लिया जाए कि लोकपाल का मुद्दा बे-मानी है ....इसके निहितार्थ तो ये निकलते है ..अगर कल को कोई व्यक्ति भीड़ लेकर दिल्ली आकर भारत विभाजन कि बात कहेगा तो ये सरकार उसकी बात को फ़ौरन मान लेगी क्योकि उसके पीछे भीड़ है .............शेखचिल्लियों कि तरह वर्ताव कर रही है सरकार ,इन्हें शायद अंदाज़ नहीं है ...इनकी साख कितनी गिर चुकी है .........प्रसून जी ...आप का लेख काफी अच्छा और तार्किक लगा ..........

HARISH TIWARI said...

SIR JANTA TO YE BHID NAHI KARNA CHAHATI USKO TO APNE HI DUKHON SE FURSAT NAHIN HAI UPAR SE YE POLITICIAN OR DIVIDE N RULE KI POLICY KAR PARESHAN KIYE REHTE HAIN. NA CONGRESS NA BJP, SP, BSP ETC ETC ALL PARTIES APNA MATLAB NIKAL RAHA HAI JAB UP, ASSAM ME DANGE HO RAHE THE TAB SAB DELHI MEIN PRESIDENTIAL PARTY KE MAJE LE RAHE THE SIR IN SABKE LIYE AAPKI MEDIA BHI BAHUT ZIMEDAAR HAI. CBI, IT DEPTT, AND ALL GOVT. DEPTT. INKE SERVANT JINKO JAB JAHAN GUMA DIYA. KISI NE JYADA KAHA WO TO GAYA IN NETAON KO ITNI SUVHIDA KYUN? KISI AAM PUB. KA USERS BILL NAHI JAMA NAHI HUA TO CONNECTION CUT OR IN PAR LAKON KA DUE KUYN? PRESIDENT DESH KI JANTA KO THANKS KEHTE HEIN CHUNNE KE LIYE KYA UNKO JANTA TO IS TAMASHE ME TO KAHIN HOTI NAHIN. MUJHE GARV HAI KI MEIN IS GANDI VOTING KA HISSA NAHIN HUN. HAMARI MEDIA SE GUZARISH HAI KI WO SIRF SACH KA SAATH DE. CORUPT POLITICIAN KI POL KHOLE PAR UMEED NAHIN HAI KYUNKI AAP LOG BHI TO UNHI KE KEHNE PAR CHALTE HEIN JO WO KAHENGE WO AAP DIKHAYNGE. SO WAIT N WATCH INDIA EK SECOND KRANTI KI TARAF BHAD RAHA HE JISKA MISSION WAHI ANGREJO BHARAT CHODO NAHIN, CORRUPTION(ALL POL, BUSI N PEOPLE) BHARAT CHODO HOGA YE SAB DEKH KAR AAP YE NA SOCHEN KI HUM KISI KE SAATH HEIN. YE AAM JANTA KE DIL KA GUSSAN HAI JO KABHI PHAT SAKTA HAI.......sO AGAIN WAIT N WATCH.

अमित चौधरी said...

thank god there are few people in the media who is understanding this wave. otherwise I see people knowingly ignoring the same.